आप में से बहुत सारे लोगों ने जेम्स बांड का नाम सुना होगा। लेखक ने जेम्स बांड के नाम को विश्व के एक प्रसिद्ध जासूस के तौर पर मशहूर कर दिया था। उसका लोकप्रिय सीक्रेट कोड था 007. जेम्स बांड की ही तरह भारत का चुनाव आयोग भी पूरी दुनिया में मशहूर है। लगता है आजकल इसका भी प्रिय कोड 0, 00, 000 हो गया है। जहां की मतदाता सूची देखो उसमें 0 नंबरों के मकान बहुतायत में दिख रहे हैं। लेकिन जेम्स बांड और चुनाव आयोग में एक बुनियादी फर्क है। जेम्स बांड घटनाओं का हल पेश करता था, समस्याओं को सुलझाता था यहां चुनाव आयोग तथ्यों को छुपाता है, समस्याओं को बढ़ाता है, अधर में लटकाता है।
पिछले पूरे हफ्ते बिहार में मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण विवाद को लेकर संसद नहीं चली। बिहार का मुद्दा तो था ही सात अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक संवाददाता सम्मेलन किया और उसमें साबित करने की कोशिश की कि नरेंद्र मोदी की वर्तमान सरकार लोगों के मत से जीतकर नहीं बल्कि चोरी के वोटों से बनी है। उन्होंने इसके लिए बंगलौर की एक संसदीय सीट की एक विधान सभा महादेवपुरा के आंकड़े सामने रखे। जिसमें उनके अनुसार करीब एक लाख फर्जी वोट जोड़े गये थे। उस लोकसभा सीट में कुल छह विधान सभा सीटें हैं।
तीन विधान सभा क्षेत्रों में कांग्रेस बीजेपी से आगे थी लेकिन महादेवपुरा की एक सीट पर बीजेपी प्रत्याशी ने एक लाख से ज्यादा वोटों से बढ़त बना ली और वह करीब 35 हजार वोटों से जीत गया। राहुल गांधी का कहना है कि यह जीत मुख्यतया उन एक लाख वोटों के कारण हुई जो फर्जी ढंग से जोड़े गए थे। राहुल गांधी का यह भी कहना है कि नरेंद्र मोदी को अगर 25 सीटें और कम मिलतीं तो ये किसी कीमत पर प्रधानमंत्री नहीं बन सकते थे। इस समय एनडीए के पास कुल 294 सांसदों का समर्थन है जबकि सरकार बनाने के लिए 272 सांसदों की जरूरत है। यानि बहुमत से महज 22 सांसद ज्यादा। अगर 25 सीटें और कम मिलतीं तो ये बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाते। उन्होंने यह भी दावा किया कि ये 25 सीटें नरेंद्र मोदी ने ऐसे ही चोरी के वोटों से जीती हैं जैसे बंगलौर वाली सीट जीती है।
अगर चुनाव आयोग 35 हजार से कम वोटों से जीती बीजेपी की डिजिटल मतदाता सूची उन्हें उपलब्ध करा दे तो वे साबित कर देंगे कि कितने वोटों की चोरी की गई है। वोट चोरी के मामले में एक बड़ी बात सामने यह आई कि एक ही मकान पर पचास-साठ लोगों के वोट बने हुए हैं। राहुल गांधी ने संवाददाता सम्मेलन में एक मकान का नंबर बता कर दिखाया कि वहां एक कमरे के मकान में 80 वोटर हैं। बाद में एक मीडिया संस्थान ने उस मकान की जांच की और उस पर बने 80 वोटरों की पुष्टि की। जब वह संवाददाता उस मकान पर पहुंचा तो वहां उन 80 वोटरों में से कोई भी नहीं था।
अभी राहुल गांधी के खुलासे से लोग अचंभित ही थे कि इसी बीच चुनाव आयोग ने बिहार की जो मतदाता सूची जारी की है उसके भी खुलासे होने लगे हैं। रविवार को राजद नेता तेजस्वी यादव ने एक संवाददाता सम्मेलन किया और दावा किया कि बिहार में करीब तीन लाख ऐसे मकान हैं जिनके नंबर 0,00,000 हैं। और उन मकानों पर पचास, साठ, सौ, दो सौ वोटर हैं। और उन मकानों में ब्राह्मण, बनिया, ठाकुर, दलित, सवर्ण, ओबीसी सब एक साथ रह रहे हैं। जमुई के एक गांव आमीन में एक ही घर में 558 वोटर बनाये गये हैं। यह मकान 89 साल की शकीला खातून का बताया गया है और उनके परिवार में 558 वोटर हैं। एक दूसरे घर में शमा परवीन के साथ अनिल साव की पत्नी प्रियंका रहती हुई दिखाई गई हैं।
अफजल के साथ जयराम रहते हुए बताये गये हैं। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं। आमीन गांव जमुई विधान सभा क्षेत्र के जमुई सदर प्रखंड के अंतर्गत आता है। जो मामला सामने आया है वह मतदान केंद्र संख्या 86 का है। इस केंद्र पर कुल 618 मतदाता हैं जिनमें से 558 एक ही घर में रहते हुए दिखाए गए हैं। इसी तरह से मध्य प्रदेश में हजारों घर ऐसे पाए गए जिसमें एक ही घर में सौ-सौ, दो-दो सौ मतदाता हैं। दरअसल यह किसी एक राज्य की बात नहीं बल्कि पूरे देश में ऐसा हुआ है। कुछ महीने पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में हरियाणा के वोटरों के नाम हैं।
इस पर चुनाव आयोग ने वोटरों की डुप्लीकेसी की बात मानी थी और कहा था कि इन गलतियों को अगले तीन महीने में सुधार लिया जाएगा। लेकिन अभी तक भी यह सब नहीं हो सका है। दरअसल हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों के बाद यह आरोप लगने लगा था कि दस-बारह लाख लोग ऐसे हैं जो अलग अलग राज्यों में जाकर वोट करते हैं। राहुल गांधी ने बंगलौर सीट पर जो तथ्य जुटाए हैं उनमें एक वोटर ऐसा भी है जिसने चार अलग-अलग राज्यों में वोट किया है।
इन सब मामलों में चुनाव आयोग सामने आकर बात नहीं कर रहा है। वह सूत्रों के हवाले से बात कर रहा है। राहुल गांधी ने तथ्यों के साथ जब खुलासा किया तो उसने कहा कि राहुल गांधी एफिडेविड दें तो हम इस मामले को देखेंगे। अरे भाई अगर किसी ने तुम्हें तुम्हारी कोई खामी बताई तो तुम्हें तो उसका धन्यवाद देना चाहिए और आभार जताना चाहिए कि तुम्हारा काम उस व्यक्ति ने कर दिया। लेकिन तुम उल्टे एफिडेविड मांग रहे हो।
इस पर सपा के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि इस साल के शुरू में उत्तर प्रदेश की करीब दस सीटों पर उप चुनाव हुए। उनमें से एक सीट पर 17 हजार लोगों के वोट काट दिये गये। मैंने लिखित में चुनाव आयोग से शिकायतें कीं। आखिर चुनाव आयोग ने क्या किया? आज तक चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। दरअसल यह सब खेल ही चुनाव आयोग का है। सारी गड़बड़ियों में वह खुद शामिल है या उसकी कमी है। इसलिए वह मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाहता है।
लेकिन इस मामले ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। राहुल गांधी ने कर्नाटक में अपनी कांग्रेस सरकार से कहा है कि वो वोट चोरी मामले की जांच करें। उस सीट से हारे प्रत्याशी और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष तथा राज्य सरकार में उप मुख्यमंत्री शिव कुमार ने कर्नाटक के केंद्रीय चुनाव आयोग के दफ्तर में जाकर लिखित में दिया है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए। इसके साथ ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्य के एडवोकेट जनरल से इस मामले में कानूनी सलाह मांगी है ताकि मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू की जा सके। तो अब चुनाव आयोग का भागना बड़ा मुश्किल हो गया है। कार्रवाई शुरू होगी तो बीएलओ जैसी छोटी मछली से लेकर बात मुख्य चुनाव आयोग तक पहुंच सकती है। तब शायद जेम्स बांड 007 भी तब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मदद न कर पाए।
(अमरेंद्र कुमार राय वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
